दूध पिलाने की पोजीशन(अवस्था)

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फीडिंग पोज़िशन का मतलब है कि स्तनपान करते समय आप अपने बच्चे को किस अवस्था में पकड़ती हैं।

अच्छे से स्तनपान कराने के लिए यह बहुत ज़रूरी है, ख़ासकर जन्म के बाद, पहले कुछ दिनों में जब आपका दूध बनना शुरू हो जाता है।

जब आप अपने बच्चे को सही से पकड़ती हैं, तो आपका बच्चा सही से स्तनपान कर पाता है। जब बच्चा सही अवस्था में होता है तब वह सही से दूध पी पाता है। आपका बच्चा जितना ज़्यादा दूध पिएगा दूध उतना ही ज़्यादा बनेगा।

एक अच्छी फीडिंग पोज़िशन – ऐसी अवस्था जिसमें बच्चा सही से स्तनपान कर सके- मतलब के आपके पास पर्याप्त मात्रा में स्तनदूध है और आप सही से दूध पीला पा रही हैं।

एक अच्छी दूध पिलाने की पोजीशन (अवस्था)  प्राप्त करने के उद्देश्य क्या हैं?

  • आपको आरामदायक स्थिति में होना चाहिए

दूध पिलाते समय आपकी कमर और आपके कंधो में दर्द नहीं होना चाहिए

आपको निप्पल में दर्द का अनुभव नहीं होना चाहिए। (स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) कराते समय निप्पल में दर्द के बारे में अधिक जानने के लिए हमारा ब्लॉग पढ़ें)।

आपको अवरुद्ध नलिकाओं या मास्टिटिस से पीड़ित नहीं होना चाहिए। (मास्टिटिस एक दर्दनाक स्थिति है जिसमें ब्रेस्ट का कुछ हिस्सा लाल और गर्म हो जाता है और सूज जाता है। अगर इसका इलाज नहीं किया जाता तो यह बुखार, थकान और ठंड लगने का कारण बन सकता है)।

  • आपका बच्चा आरामदायक स्थिति में होना चाहिए

आसानी से दूध निगलने के लिए सिर और शरीर एक सीधी रेखा में होना चाहिए।

आपका बच्चा/बच्ची अपने सिर को आसानी से पीछे की ओर झुकाने में सक्षम होना चाहिए।

निप्पल के आसपास का लगभग पूरा घेरा(अरेओला) आपके बच्चे के मुंह के अंदर होना चाहिए।

स्तनपान के दौरान बच्चे को ब्रेस्ट के बल नहीं सोना चाहिए।

दूध पीते समय आपका बच्चा निराश नहीं होना चाहिए।

दूध पिलाने की अलग-अलग पोजीशन क्या हैं?

आपको और आपके बच्चे को कुछ ही दिनों में आपकी पसंद की स्थिति मिल जाएगी। जब तक आप नहीं मिलती – इन स्थिति से शुरू करें।

  • क्रॉस क्रैडल होल्ड:

यह दूध पिलाने की पोजीशन नवजात बच्चों के लिए सबसे अच्छी होती है।

झुकी हुई स्थिति में बैठें

 अगर आप अपने बच्चे को दाहिने ब्रेस्ट से दूध पिला रही हैं – अपने ब्रेस्ट को अपने दाहिने हाथ से और अपने बच्चे को बाएं हाथ से सहारा दें।

आपको अपने बच्चे के पेट को अपने पेट लगा कर रखना चाहिए।

इस पोजीशन में आपका बच्चा खुद से स्तनपान कर सकता है।

आपकी भूमिका आवश्यकता के अनुसार बच्चे के सिर और अपनी ब्रेस्ट को सपोर्ट देना है।

  • क्रैडल होल्ड:

एक बार जब आप अपने बच्चे के लेटने के तरीके से सहज हो जाएं, तो आप होल्ड करने की इस स्थिति पर आ सकती हैं।

एक आरामदायक कुर्सी पर अपनी कमर सीधी करके बैठें।

अगर आप अपने बच्चे को अपने दाहिने ब्रेस्ट से दूध पिला रही हैं, तो उसके सिर को अपने दाहिने हाथ के मोड़ पर रखें।

अपने बच्चे को इस तरह लेटाएं कि उसका पेट आपके पेट के सामने हों।

फिर अपने बच्चे को उठाएं और अपने बाएं हाथ से ब्रेस्ट को सहारा देते हुए और पोजीशन देते हुए उसे दूध पिलायें ।

  • फुटबॉल होल्ड:

 अगर आप सिजेरियन सेक्शन के कारण दर्द में हैं तो यह स्थिति आपके लिए अच्छी है।

इस होल्ड में – आप सीधे बैठते हुए बच्चे को अपने साथ में तकिए पर लिटाएं।

 अगर आप अपने बच्चे को दाहिने ब्रेस्ट से दूध पिला रही हैं तो सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे का सिर आपकी दाहिनी हथेली में है और उसके पैर आपकी दाहिनी कोहनी के नीचे टिके हुए हैं।

अपने बाएं हाथ से अपने ब्रेस्ट को सहारा दें और अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए उसे ऊपर उठाएं।

  • साइड में लेटने की पोजीशन:

अगर आपका सिजेरियन सेक्शन हुआ है तो यह स्थिति आपके लिए अच्छी है। लेकिन आपको इस पोजीशन में दूध पिलाते समय कभी नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे का दम घुट सकता है।

दाहिने ब्रेस्ट से दूध पिलाने के लिए, अपनी दाहिनी ओर लेटें।

अपने बच्चे को अपने दाहिने हाथ से और अपने ब्रेस्ट को अपने बाएं हाथ से सहारा दें।

यह पता लगाने और समझने का प्रयास करें कि आपके लिए कौन सी फीडिंग पोजीशन सबसे अच्छी साबित हो रही है। इस पोजीशन में तब तक बने रहें जब तक कि आप और आपका बच्चा दूध पीने की कला में निपुण न हो जाएं। यह आप दोनों के लिए एक आरामदायक स्तनपान सुनिश्चित करेगा।

डॉ. देबमिता दत्ता एमबीबीएस, एमडी

द्वारा

डॉ देबमिता दत्ता एमबीबीएस, एमडी एक पेशेवर डॉक्टर, पेरेंटिंग कंसल्टेंट (पालन-पोषण सलाहकार) और डब्ल्यूपीए whatparentsask.com की संस्थापक हैं। वह स्कूलों और कॉर्पोरेट संगठनों के लिए बच्चों के पालन-पोषण पर ऑनलाइन और ऑफलाइन वर्कशॉप आयोजित करती हैं। वह ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रसवपूर्व और शिशु देखभाल कक्षाएं भी आयोजित करती है। वह पालन-पोषण में एक प्रसिद्ध विचार-नेता और खेल, सीखने और खाने की आदतों की विशेषज्ञ हैं। वह जगरनॉट द्वारा प्रकाशित पेरेंटिंग पर लिखी गई 6 पुस्तकों की लेखिका हैं और उनकी पुस्तकें सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुस्तकों में से एक हैं। पालन-पोषण के प्रति उनके सहानुभूतिपूर्ण और करुणामय दृष्टिकोण और पालन-पोषण के लिए शरीर क्रिया विज्ञान और मस्तिष्क विज्ञान के उनके अनुप्रयोग के लिए उन्हें अक्सर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशनों में उद्धृत किया जाता है।

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