रिलेशनशिप स्टेटस: कमिटिड जोड़ें जो तीन, या फिर चार होने की कर रहे हैं हैं तैयारी!!

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बच्चे के जन्म के साथ उसके माता-पिता का भी जन्म होता है। लेकिन याद रखें कि पेरेंटिंग किसी ब्लू प्रिंट के साथ नहीं आती है। यह वास्तव में एक डीआईवाई है। लेकिन एक बात तय है: स्मार्ट माता-पिता अपनी जिंदगी के इस पड़ाव की योजना जब वे सिंगल थे, फिर डबल होने से लेकर ट्रिपल होने तक की प्लानिंग करने में बेहतर होते हैं। तो क्या आप तैयार हैं माता-पिता बनने के लिए? जानने के लिए पढ़ें।

यह कोई बच्चों का खेल नहीं है।

इसके लिए जोड़ों को एक मैच्योर, स्टेबल रिलेशन में होना चाहिए। पर्सनल तौर पर उन्हें एक और बच्चे को इस दुनिया में लाने के लिए लाइफ के एक बड़े कमिटमेंट के लिए तैयार रहना चाहिए। एक बच्चे को कभी भी शादी को मजबूत करने के लिए एक टूल की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, या फिर अपने माता-पिता को खुश करने के लिए, या फिर एक डिस्ट्रेस बायोलॉजिकल क्लॉक की वजह से।

एक सोचा-समझा निर्णय:

परिवार की योजना बनाते समय, पति-पत्नी को इस बात को समझना चाहिए कि उनके भावनात्मक और वित्त-संबंधी स्थिति के संबंध में उनके जीवन में बच्चे की क्या जगह है। बच्चे के जन्म के साथ जीवन में होने वाले बदलावों पर चर्चा करनी चाहिए। आखिर इस निर्णय को बदला नहीं जा सकता है। अगर माता-पिता दोनों काम कर रहे हैं और काम पर वापस जाने का इरादा रखते हैं, तो मैटरनीटी/पैटरनीटी छुट्टी और शैड्यूल को मंजूरी मिलना ज़रूरी है। बच्चे के लिए दादा-दादी या दाई और नैनी की मदद की जरूरत होती है, तो ये समय पर मौजूद होने भी चाहिए।

मदद :

अगर माँ घर पर रहने वाली मम है, तो उसे भी अपने पति से मिलने वाली मदद के बारे में बात करने की ज़रूरत है। अक्सर घर पर रहने वाली मम को बच्चे और उससे जुड़े सभी काम करने होते हैं, सचमुच! हालाँकि, हमारी बहुत से लोग मदद कर सकते हैं लेकिन डायपर बदलने, खिलाने, बच्चे को सोने के लिए हिलाने, रात को जागने जैसे मामले में पिता अपनी तरफ से मदद कर सकते हैं, यही सभी माताओं की इच्छा होती है। इससे उन्हें लगता है कि पति इस नई जिंदगी का बहुत ज़रूरी हिस्सा है। यह पिता और बच्चे के बीच बांड अच्छा बनाने में भी मदद करता है और सबसे ज़रूरी बात यह है कि माँ को फिर से फ्रेश होने और आराम करने के लिए थोड़ा “मी टाइम” मिलता है।

हम गर्भवती हैं:

एक बार जब दोनों साथी एक ही लेवल पर हों, तो होने वाली माँ की हेल्थ को चेक करना बहुत ज़रूरी है। गायनेकोलॉजिस्ट की सलाह पर सभी ज़रूरी टेस्ट किए जाने चाहिए। बच्चा प्लान करने से पहले किसी भी स्वस्थ्य समस्या, जेनेटिक हिस्ट्री का इलाज किया जाना चाहिए या पूरी तरह से ठीक किया जाना चाहिए।

ये लाइफ स्टाइल, डायट, फिजिकल, इमोशनल और मेडिकल पैरामीटर हैं जिनका पालन करना मां के लिए बेहद ज़रूरी है। उसे अपने पति का भरा सहारा मिलना चाहिए। उसे यह महसूस नहीं कराया जा सकता कि वह पार्टी को मिस कर रही है और क्वारंटाइन में है। माँ का भावनात्मक रूप से सही रहना गर्भ में बच्चे को इमोशनल रूप से स्वस्थ और स्थिर रखता है। इसमें पिता की बहुत बड़ी भूमिका होती है। तो सभी पुरुष ध्यान दें!

नौ महीने की सहानुभूति:

जिन जोड़ों को आईवीएफ की ज़रूरत होती है, उन्हें बहुत ज़्यादा वित्तीय प्रभाव, भावनात्मक प्रभाव और माँ के हार्मोनल लेवल में भारी बदलाव का सामना करना पड़ेगा। इस समय उसके साथी का प्यार और साथ अमूल्य है। मुश्किल से मुश्किल गर्भावस्था के लिए यही सच है।

तो अब जब सब कुछ तय है, तो क्या आप मां बनने के इस सफर के लिए तैयार हैं? अगर हाँ, तो अपने बच्चे के आने का इंतजार करते हुए आपको मिलने वाले हर अनुभव और लाड़-प्यार का आनंद लें। जीवन के इस खूबसूरत नए चरण में आने के लिए शुभकामनाएँ। याद रखें, कोई भी योजना अभी भी एक जोड़े को उस चमत्कार के लिए तैयार नहीं कर सकती है जो आने वाले समय में होने वाला है। उन दोनों के द्वारा दुनिया में आई एक नई जिंदगी। प्रकृति द्वारा जीवन को आगे बढ़ाने का एक तरीका है। उसके लिए प्रकृति का कमाल और इंतज़ार हमेशा बना रहता है।

निशा गुप्ता द्वारा, एक गर्वित माँ, जो इमेज एंड एटिकेट कंसल्टेंट हैं।

निशा गुप्ता सबके लिए अच्छे करने के लिए कंपनी और लोगों के साथ काम करती हैं। 20 वर्षों से अधिक के करियर में, उन्हें हॉस्पिटेलिटी, एड्वरटाइज़मेंट, पब्लिक रिलेशन, आर्ट, इमेज और एटीकेट कंसल्टिंग जैसे कई क्षेत्रों का काफी अनुभव है।

उन्होंने मुंबई की लेडीज़ सोशल ग्रुप, अर्चना ट्रस्ट/अनिमेध चैरिटेबल जैसे गैर सरकारी संगठनों के लिए वर्कशॉप आयोजित की है। निशा ने सूरत और नासिक में महिलाओं/नेटवर्किंग ग्रुप के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन और संचालन भी किया है।

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